हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , बीती रात आईआरजीसी की नौसेना ने दो ऐसे जहाज़ों को रोका, जिन्होंने अपने पहचान एवं निगरानी सिस्टम बंद कर अवैध मार्ग अपनाया था, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा ख़तरे में पड़ गई थी। आईआरजीसी के अनुसार, इन अवैध और ख़तरनाक गतिविधियों के पीछे अमेरिका की भूमिका थी।
इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सशस्त्र बलों के तटीय ठिकानों पर हमला किया, जिसे आईआरजीसी ने अमेरिकी आक्रामकता का एक और उदाहरण बताया।
आईआरजीसी के अनुसार, इस हमले के जवाब में पहले चरण की कार्रवाई के तहत उसके लड़ाकों ने मिसाइलों और ड्रोन से जॉर्डन स्थित प्रिंस हसन एयरबेस के कई बड़े मिसाइल भंडारों और ईंधन टैंकों को निशाना बनाकर आग के हवाले कर दिया।
आईआरजीसी ने कहा कि जवाबी सैन्य अभियान अभी जारी है और उसके परिणामों की जानकारी आगामी आधिकारिक बयानों में दी जाएगी।
आईआरजीसी ने अपने दूसरे बयान में कहा कि, जवाबी कार्रवाई के तीसरे चरण के दौरान उसकी एयरोस्पेस फ़ोर्स ने कुवैत स्थित अली अल-सालेम में अमेरिकी सैन्य अड्डे के ईंधन भंडार और पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह नष्ट कर दिया। साथ ही अहमद अल-जाबेर एयरबेस में स्थापित एक रणनीतिक FPS रडार प्रणाली को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।आईआरजीसी ने कहा कि, उसके लड़ाकों की जवाबी कार्रवाई लगातार जारी है।
बयान के अंत में कहा गया, होर्मुज़ जलडमरूमध्य हमारी भूमि है और हम दुनिया के दूसरे छोर से आई किसी भी आक्रामक और निर्दोष बच्चों की हत्यारी सेना को इसमें अवैध हस्तक्षेप जारी रखने की अनुमति नहीं देंगे।
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